ये कविता Poem आचार्य भगवत दुबे जी ने आँसुओ को अपनी जागीर बताया है।
आप इन कविताओं को share कर सकते है। whatsapp और SMS में। Long sad poem in Hindi
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| Sad Poem in Hindi |
आँसू की जागीर
Agar aapko ye Long sad Poem in Hindi Achchi lagi ho to isse share Zarrur karen.सब कुछ छीना वक्त ने , बढ़ी विरह की पीरछीन नहीं पाया मगर , आँसू की जागीरआँसू की जागीर ,यही तो अक्षय धन हैइसके ही आधीन हुआ , नीरस जीवन हैकह भगवन कविराज , लिखा एकाकी जीनाबस आँसू को छोड़ , वक्त ने सब कुछ छीना

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